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कमाल कहानी प्रकाश राज की, जिन्होंने 3 भाषाओं की फ़िल्मों में नेशनल अवॉर्ड हासिल किया

B Editor

प्रकाश राज के पास सुर नहीं है. साधना ज़रूर है. उनकी ऐक्टिंग में मोहम्मद अली के पंच का पावर है. प्रत्यक्षम किम प्रमाणम. उनको मिले नेशनल अवार्ड्स इस बात का पुरजोर समर्थन करते हैं. साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री से लेकर बॉलीवुड तक अपनी अदाकारी का जलवा, कमल हासन के बाद किसी ने बिखेरा तो सही मायनों में प्रकाश राज ने ही.

26 मार्च 1965 को स्वर्णलता राय और मंजुनाथ राय के यहां एक लड़का जन्मा. नाम रखा गया प्रकाश राय. बड़ा हुआ तो बेंगलुरु के सेंट जोसफ स्कूल में दाख़िला कराया गया. माता-पिता ने सोचा होगा कि लड़का पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर, पायलेट या अफ़सर बनेगा. पर उन्हें क्या पता था लड़का कुछ और ही सोच रहा है. उसने स्कूल में प्लेज करने शुरू किये. उसे ऐक्टिंग का चस्का लग चुका था.

300 रुपये महीने पर 2000 स्ट्रीट प्लेज
प्रकाश इस चस्के को करियर में तब्दील करना चाहता था, पर पढ़ाई के साथ. पढ़ाई होती रही. और ऐक्टिंग में एक क़दम और आगे बढ़ा लिया. दिमाग लगाया. बेंगलुरु में कलाक्षेत्र जॉइन किया. अब ऐक्टिंग के पैसे मिलने लगे. पर सिर्फ़ 300 रुपये महीने. प्रकाश राय को पैसे की नहीं अभिनय की भूख थी. जैसे-जैसे दिन गुज़र रहे थे. कला के प्रति उसका प्रेम बढ़ता जा रहा था. वो प्रेम ही था कि प्रकाश ने 2000 स्ट्रीट प्लेज़ किये. उसने ख़ुद को ऐसा तपाया कि कोयला हीरा बन गया.

गाड़ी आगे बढ़ चली थी. थिएटर से शुरू हुआ सफ़र टीवी तक आ पहुंचा. प्रकाश ने दूरदर्शन के कन्नड़ सीरियल बिसिलु कुदुरे से छोटे पर्दे पर डेब्यू किया. 1988 में कन्नड़ फ़िल्म मितिलेया सीतेयारू से बड़े पर्दे पर भी पदार्पण हो गया. धंधा जम गया. प्रकाश ने कन्नड़ इंडस्ट्री में पांव जमा लिये. एक बाद एक धड़ाधड़ 8 कन्नड़ फिल्में.

प्रकाश राय कैसे बना प्रकाश राज?
इतनी देर से आप सोच रहे होंगे. प्रकाश राज को प्रकाश राय क्यों संबोधित किया जा रहा है. लिखने वाले के दिमाग़ में कोई केमिकल लोचा है क्या? बिल्कुल नहीं. एक छोटी मगर मोटी बात बताते हैं.

1993 में प्रकाश ने एक कन्नड़ फ़िल्म हरकेया कुरी में सपोर्टिंग रोल किया. फ़िल्म की लीड ऐक्ट्रेस गीता कदाम्बी की उन पर नज़र पड़ी. उन्हें प्रकाश की डायलॉग डिलवरी कमाल लगी. उन्होंने यह बात अपने मेंटर के. बालाचंदर को बतायी. बालाचन्दर को भी उनका काम बेहद पसंद आया. उन्होंने प्रकाश को अपनी फिल्म डुएट में मेन विलेन के तौर पर साइन कर लिया. इस तरह से प्रकाश ने तमिल इंडस्ट्री में भी क़दम रख दिये. के. बालाचंदर ने उन्हें अपना नाम प्रकाश राय की बजाय प्रकाश राज करने की सलाह दी. ताकि नाम में वजन आ सके. प्रकाश को बात जम गयी. और वो राय से राज बन गए.

तीन भाषाओं में नेशनल अवॉर्ड्स
इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. तमाम भाषाओं की फ़िल्में मिलती चली गयीं, वो करते चले गये. 1995 में संकल्पम फ़िल्म से तेलगू इंडस्ट्री में, 1996 में इंद्रप्रस्थम के ज़रिए मलयालम इंडस्ट्री में डेब्यू कर लिया. इसी बीच मणिरत्नम की तमिल फिल्म ‘इरुवर’ के लिए उन्हें सपोर्टिंग रोल में अपना पहला नेशनल अवार्ड मिला. अभी तक प्रकाश राज सिर्फ़ कहने को अच्छे अभिनेता थे. अब उन पर राष्ट्रीय पुरस्कार का ठप्पा लग चुका था. इसके बाद अवार्ड्स की झड़ी लग गयी. तीन भाषाओं में नेशनल अवार्ड्स. 1998 में तेलगू फ़िल्म ‘अंतपुरम’ के लिए. 2002 और 2007 में तमिल फिल्म ‘धया’ और ‘कांचीवरम’ के लिए. 2010 में प्रोड्यूसर के तौर पर ‘पुत्तक्कना हाईवे’ के लिए.

गनी भाई ने बॉलीवुड में भौकाल काट दिया
1988 में करियर शुरू करने वाले प्रकाश राज 14 सालों से साउथ की चारों प्रमुख इंडस्ट्रीज में काम कर रहे थे. और अच्छा काम कर रहे थे. फिर साल आया 2002. ‘शक्ति: द पावर’ से प्रकाश राज का, शाहरुख और नाना पाटेकर सरीखे बड़े कलाकारों के साथ, प्रॉपर बॉलीवुडीया डेब्यू. 2003 में मल्टीस्टारर फ़िल्म ख़ाकी में नज़र आये. पर बॉलीवुड इंडस्ट्री में असली पहचान मिली 2009 में आयी सलमान खान की फ़िल्म ‘वांटेड’ से. ‘वांटेड’ जिस तेलगू फ़िल्म ‘पोक्किरी’ का रिमेक थी, उसमें भी प्रकाश राज ने काम किया था. वांटेड के गनी भाई ने हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में आग लगा दी.

फिर एक के बाद एक तगड़ी कमर्शियल फ़िल्में. एक समय तो ऐसा आया कि कोई बॉलीवुड फ़िल्म बनती तो विलेन के लिए सबसे पहले उन्हें ही अप्रोच किया जाता. ‘सिंघम’ का जयकांत शिकरे. ‘दबंग-2’ का बच्चा सिंह. ‘भाग मिल्खा भाग’ का कड़क मूंछों वाला अफ़सर. और ऐसे ही तमाम रोल्स ने प्रकाश राज को बॉलीवुड में स्थापित कर दिया.

सात भाषाओं में काम
मेरे साथ कुछ भी करने का, मेरा ईगो हर्ट नहीं करने का.

क्या समझे शिकरे भाऊ बोल रहे हैं ये. प्रकाश राज की डायलॉग डिलवरी ऐसी, कि कोई भी डायलॉग हिट करा दे. और ऐसा ही हुआ. बहुत से डायलॉग. और एक भाषा में नहीं कई भाषाओं में. हर भाषा पर बेहतरीन पकड़. तमिल, तेलगू, कन्नड़, मलयालम, हिंदी, मराठी और अंग्रेजी. सब भाषाओं की फिल्मों में काम. वो भी मनचाहा और बढ़िया काम.

बेटे की मौत ने ज़िन्दगी अस्त-व्यस्त कर दी
1994 में एक्ट्रेस ललिता कुमारी से शादी हुई. शादी के बाद तीन बच्चे हुए. दो बेटियाँ और एक बेटा. पांच साल का बेटा एक दिन स्टूल पर चढ़कर पतंग उड़ा रहा था. वो स्टूल से गिरा. उसे दौरे आने लगे. कुछ समय बाद उसकी मौत हो गयी. प्रकाश को गहरा धक्का लगा.

बेटे सिद्धू की मौत के बाद पत्नी से अनबन रहने लगी. 2009 में शादी टूटी. 2010 में उन्होंने कोरियोग्राफर पोनी वर्मा से शादी कर ली. जिससे उनका एक बेटा है. वो कहते हैं:

निर्माता-निर्देशक के तौर पर भी सफल
प्रकाश राज सफल अभिनेता होने के साथ-साथ एक सफल निर्माता-निर्देशक भी हैं. उन्होंने अपनी पहली तमिल फ़िल्म डुएट के नाम से एक प्रोडक्शन कम्पनी खोली और फ़िल्म बनायी ‘धया’. जिसे नेशनल अवार्ड मिला. निर्माता के तौर पर उनकी बनायी दो फ़िल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है. अब तक वो कई तेलगु, तमिल, कन्नड़ फिल्में डायरेक्टर कर चुके हैं. निर्देशक के रूप बनायी गयी उनकी कई फिल्में क्रिटिकली अक्लेम्ड हैं.

अभिनय दौड़ रहा है. डायरेक्शन चल रहा है. और अब अपना गनी भाई तमाम साउथ सुपरस्टार्स की तरह पॉलिटिक्स में भी उतर चुका है. ‘दबंग 2’ में उनका एक डायलॉग है:

बड़ा ख‍िलाड़ी है न तू. तो खेल भी बड़ा ही होगा तेरे साथ.

इसलिए प्रकाश राज अब बड़ा खेल कर रहे हैं. और साथ ही सिनेमाई करियर में उनकी धुआंधार बैटिंग ज़ारी है. इसी उम्मीद के साथ कि वो जीवन की हर पिच पर बेहतरीन पारी खेलते रहेंगे.

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