पाकिस्तान में आए हुए हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध मंदिर के बारे में क्या आप जानते है?

B Editor

ऋषि कश्यप की तपोभूमि कश्मीर का नाम ही कश्यप ऋषि पर है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, एक बार यहां एक राक्षस जिसका नाम जलोद्भव था, उसने ब्रह्मा के वरदान से आतंक फैला रखा था। ऐसे में देवताओं की प्रार्थना पर मां भगवती ने पक्षी का रूप लेकर चोंच में पत्थर रखकर राक्षस को मारा था।

इसी कश्मीर को लेकर वर्तमान में चर्चित द कश्मीर फाइल्स मूवी भी बनाई गई है। ऐसे में आज हम आपको कश्मीर के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बता रहे है। इन प्रसिद्ध मंदिरों में मार्तंड मंदिर,महामाया शक्तिपीठ के अलावा पीओके में मौजूद शिव मंदिर व शारदा देवी मंदिर प्रमुख माने जाते हैं। इनके अलावा कश्मीर में भगवान भोलेनाथ की अमरनाथ गुफा और त्रिकूट पर्वत पर स्थित वैष्णो देवी के मंदिर भी प्रमुख है।

1. मार्तंड मंदिर:
वर्तमान समय भारत में कोर्णाक के सूर्य मंदिर, उत्तराखंड के कटारमल सूर्य मन्दिर और गुजरात के मोढेरा सूर्य मंदिर की सबसे ज्यादा चर्चा होती है। लेकिन एक समय कश्मीर के अनंतनाग जिले में मौजूद मार्तंड मंदिर अपनी भव्यता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध था। मंदिर परिसर में चौरासी खंभे हैं और इसका चबूतरा दो सौ बीस फुट लंबे और एक सौ बयालीस फुट चौड़ा है। और उस पर मुख्य मंदिर त्रेसठ फुट लंबा और तेरह फुट चौड़ा है।

माना जाता है कि दक्षिण कश्मीर के मार्तंड स्थित यह प्राचीन सूर्य मंदिर करीब 1400 साल पुराना है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सम्राट अशोक के बेटे जलुका ने 200 BC में करवाया था। जबकि इसके भीतरी ढांचे को जहांगीर के शासनकाल के दौरान किसी अज्ञात हिंदू ने करवाया था। यहां इस मंदिर से संपूर्ण पीरपंजाल पर्व श्रृंख्ला और शहर के हर भाग को देखा जा सकता है। दरअसल यह मंदिर एक पठार के ऊपर बनाया गया है, जहां से पूरी कश्मीर घाटी को देखी जा सकती है।

वहीं ये भी माना जाता है कि यह मंदिर भगवान सूर्य की उपासना के लिए कारकोट वंश के राजा ललितादित्य मुक्तापीड ने बनवाया था। जिसका जिक्र पुस्तक राजतरंगिणी (कश्मीर के प्रसिद्ध कवि कल्हण की) में मिलता है। ऐसा माना जाता है कि राजा ललितादित्य ने 7वीं और 8वीं शताब्दी के बीच में मार्तंड मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर की वास्तुकला और इंजीनियरिंग में चीन, रोमन, ग्रीक और भारतीय शैली की अनूठी झलक भी देखने को मिलती है। वहीं ये भी जिक्र मिलता है कि राजा ललितादित्य मुख्यपादय ने केवल मंदिर को अंतिम रूप प्रदान किया था।

वहीं ये भी बताया जाता है कि मार्तंड मंदिर को कश्मीर में शाह मीरी वंश के शासक सिकंदर शाह मीरी ने तोड़ा था। सिकंदर, शाह मीरी वंश का छठा शासक था। और वह 1389 ईसवीं में राजा बना था। और उसका शासन 1413 ईसवी तक रहा। ऐसे में मार्तंड मंदिर को इस दौरान ही तोड़ा गया होगा। हालांकि मंदिर के तबाह होने की एक और वजह भूकंप भी बताई जाती है। जिससे भी मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा, जो अब पिछले 700 साल में खंडहर में तब्दील हो गया।

2. महामाया शक्तिपीठ:
कश्मीर में महामाया शक्तिपीठ जो 51 शक्तिपीठों में से एक है, अमरनाथ गुफा में स्थित है। मान्यता है कि यहां देवी सती का कंठ गिरा था। यहां भगवान शिव के अतिरिक्त दो और हिमलिंग बनते हैं। जिनमें से एक को माता पार्वती का और दूसरे को गणेशजी का प्रतीक माना जाता है। यहां पूरे विधि विधान से भगवती के अंग और उनके आभूषणों की पूजा की जाती है। महामाया शक्तिपीठ के साथ ही इस पवित्र गुफा में बाबा भैरों की पूजा त्रिसंध्येकश्वहर भगवान के रूप में होती है।

3. शिव मंदिर:
पाक अधिकृत कश्मीर में कई मंदिरों का अस्तित्व अब खत्म हो चुका है, लेकिन अब यह शिव मंदिर एक खंडहर में तब्दील चुका है। भारत-पाक बंटवारे के कुछ सालों तक यह मंदिर अच्छी अवस्था में था, लेकिन पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकियों के बढ़ते प्रभाव के बीच मंदिर में श्रद्धालुओं का आवागमन कम हो गया और अब यह मंदिर वीरान पड़ा है।

4. शारदा देवी मंदिर:
भारत-पाकिस्तान की नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में यह मंदिर मौजूद है। जो लगभग पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चूका है। माना जाता है कि भगवान शिव यहां से यात्रा करते हुए निकले थे। इस मंदिर की 1948 के बाद से बमुश्किल ही कभी मरम्मत हुई। इस मंदिर की महत्ता काुी अधिक मानी जाती है। इसकी आखिरी बार मरम्मत 19वीं सदी में महाराजा गुलाब सिंग ने कराई और तब से यह इसी हाल में है।

5. अमरनाथ गुफा: अमरनाथ गुफा हिंदुओं की आस्था का विशेष केंद्र है। पौराणिक कथा के अनुसार कश्मीर में इसी जगह पर भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर होने की सुनाई थी। हर साल अमरनाथ यात्रा आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने चलती है।

6. वैष्णो देवी: जम्मू के कटरा शहर में स्थित माता वैष्णो देवी का मंदिर त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। यहां माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली पिंडी रूप में विराजमान हैं।

7.रघुनाथ मंदिर:- जम्मू और कश्मीर के जम्मू में रघुनाथ मंदिर को महाराजा गुलाब सिंह ने 1835 में बनवाया था और इसके बाद उनके पुत्र महाराजा रणवीरसिंह ने इसे 1860 मेंपूरा करवाया था। इस मंदिर की आंतरिक सज्जा में सोने की पत्तियों और चद्दरों का प्रयोग किया गया है। इस मंदिर में देवी-देवताओं की कलात्मक मूर्तियां हैं।

8. पीर खो: शिवपुराण से लेकर स्कंद पुराण और कई अन्य पुराणों में इस गुफा का वर्णन है। जम्मू शहर से 3.5 किमी की दूरी पर सर्कुलर रोड पर स्थित यह स्थान एक प्राकृतिक शिवलिंग के कारण प्रसिद्ध है। जिसके इतिहास की जानकारी आज भी नहीं मिल पाई है लेकिन, लोककथा कहतीं हैं कि इस-लिंगम के सामने स्थित गुफा देश के बाहर किसी अन्य स्थान पर निकलती है।

9. रणवीरेश्वर मंदिर: जम्मू और कश्मीर के जम्मू में प्रसिद्ध मंदिर ‘रणवीरेश्वर मंदिर’ है जिसकी ऊंचाई के आगे सारी इमारतें छोटी दिखाई पड़ती हैं। 1883 में महाराजा रणवीर सिंह द्वारा बनाया गया यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है तथा पत्थर की पट्टी पर बने प्रहत शिवलिंगों के कारण प्रसिद्ध है।

Share This Article
Leave a comment