जानें कौन हैं नीम करोली बाबा और कैसे पहुंचे आश्रम, जिनके आश्रम पहुंचते हैं बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड स्टार

B Editor

क्रिकेटर विराट कोहली अपनी पत्नी और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा व बेटी के साथ वृंदावन के बाबा नीम करोली आश्रम में पहुंचे। यहां उन्होंने ध्यान किया व बाबा की समाधि के दर्शन किए। इसके बाद से लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि बाबा नीम करोली कौन है और उनके कहां-कहां आश्रम हैं। इस लेख के माध्यम से आपको बाबा नीम करोली और उनके कहां-कहां आश्रम हैं और वहां तक कैसे पहुंचा जाए, इसे लेकर जानकारी मिलेगी।

भगवान हनुमान के भक्त थे बाबा नीम करोली
नीम करोली बाबा एक हिंदू गुरु और भगवान हनुमान के भक्त थे। उनके अनुयायी उन्हें महाराज-जी के रूप में बुलाते थे। उनका जन्म 1900 में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में हुआ था। बाबा का नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था, जो एक धनी ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे। आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है उनके माता-पिता ने उनका विवाह सिर्फ 11 साल की उम्र में कर दिया था। हालांकि, उन्होंने साधु बनने के लिए घऱ का त्याग कर दिया था। इसे लेकर जब पिता ने आपत्ति जताई, तो वह वापस घर लौट आए थे। नीम करोली बाबा के दो बेटे और एक बेटी है।

स्टीव जॉबस से लेकर मार्क जुकरबर्ग भी रहे प्रभावित
नीम करोली बाबा के पास साल 1974 में स्टीव जॉब्स अपने दोस्त डैन कोट्टके के साथ पहुंचे थे। वह उस समय हिंदू धर्म और भारतीय आध्यात्मिकता का अध्ययन करने के लिए भारत आए थे। स्टीव जॉब्स से प्राभिवत होकर फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भी 2015 में बाबा नीम करोली के कैंची धाम आश्रम पहुंचे थे। वहीं, हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स भी उनसे प्रभावित हैं। जब एक एक साक्षात्कार में उनसे उनकी हिंदू धर्म के बारे में रूचि को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने बाबा नीम करोली का नाम लिया था।

इस तरह पड़ा था बाबा का नाम
बताया जाता है कि वह एक बार ट्रेन से यात्रा कर रहे थे, लेकिन टिकट न होने पर टिकट क्लेकटर ने ट्रेन रूकवाकर उन्हें बाहर कर दिया। इसके बाद जब ट्रेन दोबारा चलने के लिए हुई, तो चालू नहीं हो सकी। ट्रेन को बार-बार चालू करने की कोशिश की गई, लेकिन वह चालू नहीं हुई। इसके बाद जब कुछ लोगों ने बाबा को वापस ट्रेन में बुलाने के लिए कहा, तो बाबा ने शर्त रखी कि रेलवे साधुओं का सम्मान करे और जिस जगह बाबा उतरे हैं, वहां एक रेलवे स्टेशन बनवाया जाए। क्योंकि, यात्रियों को स्टेशन के लिए बहुत दूर चलना पड़ता था। इसके बाद वह ट्रेन में चढ़े, जिसके बाद ट्रेन चालू हो गई। रेलवे ने अब वहां नीम करोली स्टेशन बना दिया है। बाबा भी इसी नाम से मशहूर है। डायबिटिक कोमा में चले जाने के बाद 11 सितंबर 1973 को वृंदावन के एक अस्पताल में नीम करोली बाबा की मृत्यु हो गई थी। उनके शिष्य राम दास और लैरी ब्रिलियंट ने बर्कले, कैलिफोर्निया में ‘सेवा फाउंडेशन’ की स्थापना की थी, जिसे स्टीव जॉब्स द्वारा वित्त पोषित किया गया था। बाबा नीम करोली के आश्रम सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि अमेरिका में भी हैं।

उत्तराखंड के आश्रम में जाने का रूट
उत्तराखंड में काठगोदाम तक जाने के लिए उत्तर रेलवे की नियमित ट्रेनें चलती हैं। यहां से कैंची धाम आश्रम पहुंचने के लिए दो घंटे की यात्रा कर बस या कार से पहुंचा जा सकता है।

मथुरा के आश्रम में पहुंचने का रूट
बाबा नीम करोली का दूसरा आश्रम उत्तर प्रदेश के वृंदावन में है। यहां उनका महासमाधि मंदिर भी है। आश्रम वृंदावन बस स्टैंड से सिर्फ करीब 02 किमी की दूरी पर है। यहां वृंदावन रेलवे स्टेशन से भी पहुंचा जा सकता है। रेलवे स्टेशन से भी इसकी दूरी 02 किलोमीटर है।

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