प्रेम गणपति: 150 रुपये में बर्तन धोने से लेकर 30 करोड़ के ‘डोसा प्लाज़ा’ को खड़ा करने तक का सफ़र

B Editor

दिन-रात की कड़ी मेहनत के दौरान उनके एक परिचित ने मुंबई में उन्हें काम का ऑफ़र दिया. सैलरी 1200 रुपए बताई गई थी, जो कि उनकी कल्पना से कहीं ज़्यादा थी. लेकिन, उन्हें पता था कि उनके माता-पिता उनके मुंबई जाने के फ़ैसले को मना कर देंगे. यही वजह थी कि वो बिना घर में बताए मुंबई के लिए रवाना हो गए. लेकिन, उन्हें क्या पता था कि वो परिचित उन्हें ही ठग लेगा. उस व्यक्ति ने प्रेम के 200 रुपए चुरा लिए और वहां अकेला छोड़ दिया.

छोड़ रही थीं. उन्होंने घर वापस जाने का न सोचकर यहीं किस्मत आज़माने का ठान लिया. उन्हें माहीम की एक बेकरी में 150 रुपए में बर्तन धोने का काम मिल गया. वहीं, रात में बेकरी में ही मालिक ने सोने के लिए बोल दिया था, तो इस तरह प्रेम को छत भी मिल गई. क़रीब 2 वर्षों तक प्रेम ने कड़ी मेहनत की और इस दौरान कई होटलों में काम किया. इन वर्षों में उन्होंने अपना एक मक़सद बना लिया था और वो था ज़्यादा से ज़्यादा काम करना और पैसे बचाना.

1992 में प्रेम ने ख़ुद के जमा किए हुए पैसों से व्यवसाय करने की सोचा. वो व्यवसाय था वाशी रेलवे स्टेशन के सामने इडली-डोसा बेचना. इसके लिए प्रेम ने 150 रुपए महीने पर एक ठेला किराए पर लिया और 1 हज़ार रुपए बर्तन, चूल्हा और अन्य ज़रूरी सामान ख़रीदने के लिए लगाए. काम सही चलने लगा और काम को बढ़ाने के लिए प्रेम ने अपने दो भाइयों (मुरुगन और परमशिवन) को मुंबई बुला लिया.

जल्द ही उनका परोसे जाने वाला खाना लोगों का फ़ेवरेट बन गया. इसके पीछे की वजह थी खाने की क्वालिटी और साफ़-सफ़ाई बनाए रखना. इसके अलावा वो काम के दौरान टोपी भी पहना करते थे, ताकि बाल खाने में न गिरे. लोगों की बढ़ती भीड़ ने महीने का प्रॉफ़िट 20 हज़ार रुपए तक पहुंचा दिया था. इसके बाद प्रेम गणपति वाशी में ही एक जगह किराए पर ले ली.

प्रेम के ठेले को कई बार म्युनिसिपल अथॉरिटी द्वारा सीज़ भी किया गया, क्योंकि उनके पास ट्रेड लाइसेंस नहीं था. इसके चलते प्रेम को अपना ठेला छुड़ाने के लिए जुर्माना भरना पड़ता था. हालांकि, ये समस्या तब दूर हुई जब प्रेम ने अपना ख़ुद का रेस्तरां खोला.

नए रेस्तरां की शुरुआत
सफलता की सीढ़ी चढ़ रहे प्रेम ने 1997 में वाशी में 50 हज़ार डिपॉज़िट और 5 हज़ार महीने के किराए पर एक रेस्तरा खोल दिया. इस रेस्तरां का नाम रखा गया प्रेम सागर डोसा प्लाज़ा. वहीं, काम के लिए दो कर्मचारियों को रखा गया. ये रेस्तरां कॉलेज स्टूडेंट्स के बीच काफ़ी लोकप्रिय हो गया था. पहले साल में ही इस नए रेस्तरां के ज़रिए खाने की क़रीब 26 वैरायटी शुरु की गईं. वहीं, 2002 तक यहां 105 प्रकार के डोसे बनने लग गए थे.

डोसा प्लाज़ा
प्रेम का सपना था कि वो मॉल में एक रेस्तरां खोले. लेकिन, बार-बार असफलता हाथ लग रही थी. वहीं, 2003 में किस्मत ने साथ दिया और थाणे के वंडर मॉल में प्रेम का पहला फ्रैंचाइजी आउटलेट खुला, जिसका नाम ‘डोसा प्लाज़ा’ रखा गया. इसके बाद प्रेम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. वर्तमान में डोसा प्लाज़ा की देश-विदेश में क़रीब 70 आउटलेट हैं. प्रेम का डोसा न्यूज़ीलैंड, दुबई और ओमान तक पहुंच चुका है. इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार, 2012 तक डोसा प्लाज़ा 30 करोड़ की कंपनी बन चुकी थी. वहीं, कंपनी अब निरंतर ग्रोथ पर है.

Share This Article
Leave a comment