आर बाल्की ने जीता दिल, सनी देओल नहीं चुप को बताया जा रहा दुलकर सलमान का कम्प्लीट शो

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‘चुप: रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. बॉलीवुड की थ्रिलर ड्रामा को लेकर सोशल मीडिया पर उत्साह नजर आ रहा है. दर्शक और समीक्षक फिल्म को पसंद कर रहे हैं और समीक्षाओं में जो जनादेश निकलकर आ रहा है वह फिल्म के पक्ष में ही माना जाएगा. चुप देखने वालों की इसकी फ्रेश कहानी ने बहुत प्रभावित किया है जिसे खुद आर बाल्की ने ही लिखा है. उन्होंने निर्देशन भी किया है. लोगों ने कहा कि फील गुड फ़िल्में बनाने वाले बाल्की ने पहली बार एक नए विषय में हाथ डाला है और बहुत हद तक उन्हें कामयाब ही कहा जाएगा. सीरियल किलर्स को लेकर बहुत सी कहानियों पर फ़िल्में बनाई गई हैं मगर चुप भीड़ में सबसे अलग है.

चुप का सीरियल किलर फिल्म क्रिटिक्स की हत्याएं करता है और इसी पॉइंट से चुप के कहानी की जमीन सबसे अलग हो जाती है. बाल्की, राजा सेन और ऋषि विरमानी की पटकथा को बहुत प्रभावी और रचनात्मक बताया जा रहा है. फिल्म के संवादों और जिस तरह से गुरुदत्त के संदर्भ का इस्तेमाल हुआ है उसकी भी तारीफ़ देखने को मिल रही है. एक दर्शक ने लिखा- किसी थ्रिलर ड्रामा फिल्म क्रिटिक्स, फिल्म इंडस्ट्री, एक सीरियल किलर और गुरुदत्त को लेकर इससे बेहतरीन कहानी शायद ही बनाई जा सकती है. कुल मिलाकर लोगों को आर बाल्की का निर्देशन भी ठीकठाक लगा है.

कहानी प्रिडिक्टेबल, दूसरा हिस्सा कमजोर
हालांकि कई प्रतिक्रियाओं में यह भी सामने आ रहा कि शुरू-शुरू में ही थ्रिलर ड्रामा में हत्यारे को प्रिडिक्टेबल है बावजूद बाल्की तारीफ़ के काबिल हैं जो उन्होंने अंत तक फिल्म में दिलचस्पी बनाए रखी है. सिलसिलेवार हत्याओं, इन्वेस्टिगेशन और उसके आसपास तमाम रचनात्मक चीजों ने फिल्म को संभाल लिया है. पब्लिक रिव्यू में बाल्की की कहानी, उसकी लिखावट और निर्देशन को पास माना जा सकता है. जहां तक ओवरऑल फिल्म की मजबूती का सवाल है तमाम दर्शकों ने माना है कि चुप का फर्स्ट हाफ जितना शानदार है उसके मुकाबले दूसरा हिस्सा कमजोर है. बावजूद अच्छी बात यह है कि सिनेमाघर में बैठकर हिंदी थ्रिलर देखते हुए बोरियत महसूस नहीं होती.

जहां तक परफॉर्मेंस की बात है मुख्य भूमिका निभाने वाले दुलकर सलमान लोगों की प्रशंसा बटोरते नजर आ रहे है. दुलकर की तारीफ़ फ्रीव्यू शोज देखने के बाद ही होने लगी थी. कई लोग यहां तक कहते नजर आ रहे कि यह उनके करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस है. वैसे दुलकर की पिछली फिल्मों को लेकर भी उन्हें बेस्ट परफॉर्मेंस का तमगा मिल चुका है और लगभग सितारों को ऐसी तारीफें उनके प्रशंसक देते हैं. कौन सी ज्यादा बेस्ट परफॉर्मेंस है यह तय करने में कन्फ्यूजन है. लेकिन चुप के किरदार के जरिए दुलकर ने जो जादू दिखाया है वह हिंदी दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है. चुप को पूरी तरह से दुलकर सलमान का शो बताया जा रहा है.

परफॉर्मेंस के मामले में चुप का सबसे बड़ा हासिल सनी देओल को भी माना जा सकता है. याद नहीं आता कि पिछली मर्तबा सोशल मीडिया पर एक्टर का नाम फिल्मों में जोरदार अभिनय के लिए कब ट्रेंड किया था. फिलहाल सनी देओल ट्रेंडिंग टॉपिक हैं. कई लोगों ने कहा थ्रिलर ‘डर’ के सालों बाद सनी को इस तरह की दमदार भूमिका में देखकर अच्छा लगा. उन्होंने अपने काम को बहुत खूबसूरती ने किया है. पूजा भट्ट और श्रेया धन्वंतरी जैसे सितारों की भी तारीफें मिल रही हैं.

क्या है चुप की कहानी?
चुप एक सीरियल किलर की कहानी है. डैनी नाम का एक लड़का बांद्रा में फूल बेंचता है. फूल की दुकान पर उसकी मुलाक़ात निला नाम की एक जर्नलिस्ट से होती है. निला फूलवाले से बहुत प्रभावित होती है दोनों नजदीक आ जाते हैं. इसी बीच एक मशहूर फिल्म क्रिटिक की उनके घर में हत्या कर दी जाती है. हत्या की गुत्थी सुलझाने का काम इंस्पेक्टर अरविंद माथुर को मिलता है. जांच के दौरान कुछ और फिल्म क्रिटिक्स की हत्याएं एक पर एक होती हैं. सबसे में एक ही पैटर्न नजर आता है. यह साफ हो जाता है कि कोई फिल्मों की तीखी समीक्षाओं को करने के लिए हत्याएं कर रहा है.

इंस्पेक्टर माथुर सभी समीक्षकों को सेफ्टी के लिए पॉजिटिव समीक्षाएं करने को कहता है. सभी क्रिटिक्स मान जाते हैं मगर निला के पब्लिकेशन में काम करने वाला एक क्रिटिक जिद पर अड़ जाता है और फिल्म की बहुत तीखी समीक्षा लिखता है. इसके बाद उसके घर के बाहर आनन फानन में सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किए जाते हैं. समीक्षक हत्यारे का अगला निशाना हो सकता है. फिल्म में आगे क्या-क्या होता है यही कहानी दिखाई गई है.

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