जानिए किन राशियों के लोगो को मिलेगा नवंबर के महीने में विदेश यात्रा का सुख

जानिए किन राशियों के लोगो को मिलेगा नवंबर के महीने में विदेश यात्रा का सुख

हर व्यक्ति की जीवन में एक अभिलाषा जरूर होती हैं की वह किसी अन्य देश की यात्रा करें चाहें बाहर की दुनिया की तस्वीरें या फिर वहां के लोगों की जीवनशैली देखने की ललक हो विदेश यात्रा हमारे जीवन में नए अवसर और उन्नति भी लाती है। हममें से अधिकांश की इच्छा होती है कि कम से कम एक बार तो विदेश यात्रा कर ही लें।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जातक जन्मकुंडली में कई योग संयोग देखकर पता लगाया जा सकता है कि उसके जीवन में विदेश यात्रा का अवसर है या नहीं हिंदू धर्म में ज्योतिष शास्त्र का काफी महत्व हैं , आपके नामों से राशि का पता लगाकर आपके जीवन में किया कुछ घट रहा हैं इससे पता लगाया जा सकता है। चाहें आपके जीवन में विदेश यात्रा की सुख हैं या नहीं अगर आपके कुंडली में अष्टम भाव में विदेश यात्रा का विचार किया जाता है.

नवें भाव में लंबी यात्रा का देखी जाती है. इसी तरह 12वें भाव में विदेश जाने और विदेश में रहने की स्थति का विचार किया जाता है. वहीं लग्रेश सप्तम भाव में किसी शुभ ग्रह के साथ हो तो व्यक्ति विदेश में रहता है. आए बात करते हैं किसके जीवन में विदेश यात्रा की सुख हैं।

वृष
वृष राशि के जातकों की राशिफल में अगर लग्न में सूर्य तथा चंद्रमा द्वादश भाव में हो तो व्यक्ति विदेश यात्रा तो करता ही है बल्कि विदेश में ही व्यापार-व्यवसाय में सफल होता है। वृष लग्न का शुक्र केंद्र में हो और नवमेश नवम भाव में हो तो विदेश यात्रा का योग होता है।

कर्क –
कर्क राशि वालों की जीवन रेखा में लग्न के लोगों का लग्नेश व चतुर्थेश बारहवें भाव में स्थित होने पर निश्चित जातक को विदेश यात्रा का अवसर मिलता है। कर्क लग्न यदि लग्नेश नवम भाव में स्थित हो और चतुर्थेश छठे, आठवें या द्वादश भाव में हो तो कई विदेश यात्राएं होती हैं।

सिंह –
लग्न में गुरु, चंद्र 3, 6, 8 या 12वें भाव में बैठे हो तो विदेश यात्रा के योग बनते हैं। सिंह लग्न के लोगों में लग्नेश के द्वादश भाव में स्थित ग्रह अपनी उच्च राशि में स्थित हो तो विदेश यात्रा का योग बनता है

तुला –
तुला की वालों की पढ़ाई लिखाई में हमेशा तेज होता है। इसके जीवन लग्न में नवमेश बुध उच्च का होकर बारहवें भाव में स्वराशि में स्थित हो, राहु से प्रभावित हो तो राहु की दशा अंतर्दशा में विदेश यात्रा होती है। यदि चतुर्थेश व नवमेश का परस्पर संबंध हो तो विदेश यात्रा का योग बनता है।

धनु लग्न में अष्टम स्थान का कर्क राशि का चंद्रमा व्यक्ति को कई बाद विदेश यात्रा कराता है। द्वादश स्थान में मंगल, शनि आदि पाप ग्रह बैठे हों तो भी विदेश यात्रा का योग बनता है।

मकर लग्न में सप्तमेश, अष्टमेश, नवमेश या द्वादशेश के साथ राहु या केतु की युति विदेश यात्रा का योग बनाती है। मकर लग्न, चतुर्थ और दशम भाव में चर राशि के किसी भी स्थान में शनि हो तो विदेश यात्रा होती है।

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