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सोमनाथ मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा की रात हुई अलौकिक घटना, जिसने भी देखा वह दंग रह गए…..

हमारे देश में ऐसे कई मंदिर हैं जिनका सबसे अधिक महत्व है, इन मंदिरों में ऐसे चमत्कार हैं जिनका समाधान आज तक विज्ञान भी नहीं कर पाया है।गुजरात में भी ऐसे कई मंदिर हैं, जबकि सौराष्ट्र में सोमनाथ मंदिर की महिमा अनेरो है।12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ महादेव की महिमा अनुपम है और उनके दर्शन करने लाखों भक्त आते हैं।

फिर आज कार्तिकी पूर्णिमा के दिन मध्यरात्रि में सोमनाथ मंदिर में दिनचर्या के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना व महाआरती की गई। इस महापूजा के समय, मध्यरात्रि 12 बजे, सोमनाथ मंदिर के शीर्ष पर एक खगोलीय अलौकिक घटना घटी होगी जहाँ वास्तविक चंद्रमा देवता विराजमान थे।इसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे।

रात 12 बजे एक ही सीधी रेखा में चंद्रमा शिवालय और शिवलिंग का महामेरु शिखर आया, प्राकृतिक संयोग बना।भक्तों ने भी उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया और इस घटना को देखकर सभी भक्तों ने प्रणाम किया।

उल्लेखनीय है कि सोमनाथ मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाती है।जैसा कि पुराणों में उल्लेख है, इस रात को देवताओं की दिवाली के रूप में मनाया जाता है।इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरा नाम के राक्षस का वध किया था।

कार्तिकी पूनम के दिन विशेष भगवान सोमनाथ चंद्रमा को अपने सिर पर धारण करते हैं।शास्त्रों के अनुसार, जब भगवान भोलेनाथ चंद्रमा में विराजमान होते हैं, तो ऐसा माना जाता है कि कुछ क्षण के लिए अमृत बरसता है।फिर पिछले कई वर्षों से मध्य रात्रि में दूर-दूर से कई शिव भक्त सोमनाथ आते हैं।

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