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तुंगनाथ मंदिर सबसे ऊंचे स्थान पर है, वहा शिवाजी के भक्तों के साथ-साथ ट्रेकिंग पसंद करने वाले लोग भी यहां आते हैं..

उत्तराखंड में शिवाजी के पांच विशेष मंदिर हैं, जिन्हें पंच केदार कहा जाता है। इनमें केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर मंदिर शामिल हैं। तुंगनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में लगभग 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

यही कारण है कि यह दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। तुंगनाथ दर्शन के लिए सोनप्रयाग पहुंचना पड़ता है। फिर गुप्तकाशी, ऊखीमठ, चोपता से होते हुए तुंगनाथ मंदिर पहुंचा जा सकता है। सावन के महीने में यहां कई शिव भक्त आते हैं।

ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर करीब एक हजार साल पुराना है और इस स्थान का संबंध महाभारत काल से भी है। तुंगनाथ से लगभग 1.5 किमी दूर चंद्रशिला चोटी है। इसकी ऊंचाई करीब 4000 मीटर है। चोपता से तुंग तक की वन-वे ट्रेकिंग में लगभग 1 से 1.30 घंटे लगते हैं।

तुंगनाथ उत्तराखंड में गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जिले में एक पर्वत है। तुंगनाथ मंदिर इसी पर्वत पर स्थित है। मंदिर के बारे में कहानी यह है कि इसे पांडवों ने बनाया था। कुरुक्षेत्र में हुए नरसंहार से पांडव बहुत दुखी हुए थे।

वे शांति के लिए हिमालय क्षेत्र में आए थे। उस समय उन्होंने शिवाजी को प्रसन्न करने के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने शिवाजी को पाने के लिए इस क्षेत्र में तपस्या की थी।

इस समय यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में कोरोना की वजह से काफी गिरावट आई है। फिर भी ट्रैकिंग के शौकीन यहां आ रहे हैं। मंदिर भी भक्तों के लिए खुला है। कोरोना महामारी से जुड़े नियमों का पालन करते हुए यात्रा की जा सकती है।

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