स्त्री के इस अंग को गलती से भी नहीं छूना चाहिए, अन्यथा उसे भयंकर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

स्त्री के इस अंग को गलती से भी नहीं छूना चाहिए, अन्यथा उसे भयंकर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

भारत एक ऐसा देश है जहां महिलाओं को देवी माना जाता है। भारतीय लोग देवी-देवताओं की पूजा किए बिना अपने अनुष्ठानों और पूजा प्रक्रियाओं को पूरा नहीं कर सकते हैं। यह बिल्कुल सत्य है कि नारी ईश्वर की सर्वोत्तम कृति है। इतिहास में महिलाओं के कारण कई युद्ध हुए हैं, चाहे महाभारत हो या रामायण। महिलाओं के योगदान के बिना लगभग सभी धार्मिक आयोजन अधूरे हैं।

ऐसा देखा जाता है कि ज्योतिष और धार्मिक कर्मकांडों के अनुसार महिलाओं को कई तरह से प्रतिबंधित किया जाता है। घर में सुख-शांति चाहते हैं तो महिलाओं को कई तरह के नियमों से गुजरना पड़ता है, लेकिन पुरुष इन सभी रिवाजों से दूर रहते हैं। आज हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे करने से पुरुषों को बचना चाहिए।

दरअसल, पुरुषों को इस बात की जानकारी तब होनी चाहिए जब पुरुष सबसे ज्यादा उत्तेजित हों। दरअसल पुरुषों को किसी भी महिला की नाभि को नहीं छूना चाहिए। इसलिए महिला को संबंध बनाते समय कभी भी अपनी नाभि को नहीं छूना चाहिए। एक महिला को कभी भी जबरदस्ती नहीं करना चाहिए और हमेशा सम्मान के साथ व्यवहार करना चाहिए।

नारी की नाभि में होती है मां कलि
नाभि न छूने के पीछे एक कारण होता है और यह कारण धार्मिक होता है। ऐसा कहा जाता है कि एक महिला की नाभि पवित्र होती है और उसमें मां काली की शक्ति होती है। जब भी कोई पुरुष किसी महिला की नाभि को छूता है तो मां नाराज हो जाती है। यह बात तो सभी जानते हैं कि स्त्री देवी के समान होती है, इसलिए उसकी नाभि में देवी की शक्ति का वास होता है।

अगर किसी महिला की नाभि को छुआ जाए तो इसका मतलब है कि वह मां काली की शक्ति को चुनौती दे रही है। इससे मां नाराज हो जाती है। इसलिए स्त्री की नाभि को छूना पुरुषों के लिए वर्जित माना गया है। कोई भी पुरुष जो स्त्री को छूता है, वह बड़े पाप में भागीदार बन जाता है। जिससे उसे आगे चलकर उसका फल भोगना है।

मानव शरीर में नाभि का महत्व

नाभि मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। नाभि के बाद हृदय और फिर मस्तिष्क को महत्वपूर्ण माना जाता है। तब सभी अंगों का महत्व बढ़ जाता है। मस्तिष्क में ज्ञान का फूल खिलता है। प्रेम का फूल तो दिल में खिलता है, लेकिन मानव शरीर और उसकी जीवन ऊर्जा नाभि में निहित है।

ऐसा कहा जाता है कि पिछले पांच हजार वर्षों में मानव जीवन के पतन का कारण यह है कि हमने अपना पूरा ध्यान मस्तिष्क या हृदय पर केंद्रित कर दिया है। नाभि के कार्य और महत्व पर हमने कभी विचार नहीं किया। इसलिए मनुष्य अतीत में गिरे हैं। आज भी लोग दिमाग और दिल को ज्यादा अहमियत देते हैं।

महिलाओं के लिए नाभि बहुत जरूरी
एक बच्चा माँ के गर्भ में पैदा होता है और वहीं उसका पालन-पोषण होता है। बच्चा माँ से सिर या दिल से नहीं, बल्कि नाभि से जुड़ा होता है। जन्म के बाद बच्चे को नाभि से अलग कर दिया जाता है। इसी नाभि से उसे जीवन शक्ति मिलती है। माँ की जीवन शक्ति शिशु को नाभि से ही प्राप्त होती है। बच्चा अपनी नाभि के माध्यम से शरीर से जुड़ा होता है।

नाभि की सफाई का रखें विशेष ध्यान

यह महत्वपूर्ण है कि नाभि शरीर का केंद्र हो। इसकी सफाई की बहुत जरूरत है। अगर सर्दी के मौसम में नाभि में तेल डाल दिया जाए तो शरीर की त्वचा कभी नहीं सूखती।

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